बुधवार, 20 सितंबर 2017

वी एम बेचैन  :---  भिवानी के सुप्रसिद्ध कवि, पत्रकार एवं फिल्मकार श्री वी एम बेचैन द्वारा मेरे हरियाणवी उपन्यास ' जाट कहवै , सुण जाटणी ' पर दी गई प्रतिक्रिया प्रस्तुत है :- 
दस दिन पहले हिसार निवासी प्रदीप नील द्वारा लिखित हरियाणवी उपन्यास ' जाट कहवै , सुण जाटणी ' प्राप्त हुआ। लम्बे समय से भाई के इस उपन्यास की चर्चा सुनने को मिल रही थी। सबसे पहले तो धन्यवाद कि प्रदीप भाई ने मुझ तक अपना यह प्यार अपना उपन्यास पहुँचाया। 
दूसरी ख़ास बात जो पढ़ने के बाद मुझे इस उपन्यास में नज़र आई वो ये कि ,,,,प्रदीप जी ने बेहद ही सुलझे हुवे स्वभाव के साथ इसको लिखा है,,,228 पृष्ठ के इस उपन्यास को ,एकदम तो नहीं पढ़ पाया लेकिन दो तीन बैठक में टाइम निकालकर जैसे ही पढ़ा,,,,मज़ा आ गया,,,
हरियाणवी को आज ऐसे ही कलमकारों की जरूरत है जो हरियाणवी के मर्म को न केवल समझ सके बल्कि उसको अपनी साफ सुथरी लेखनी के माध्यम से जन जन तक पहुंचा सके,,,भाई प्रदीप को इस साफ़ सुथरे हरियाणवी प्रयास के लिए बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाये कि आप इसी तरह लिखते रहे और माँ बोली हरियाणवी की सेवा करते रहें।



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