बुधवार, 20 सितंबर 2017

विकास हरियाणवी सातरोड़ : ---  सबसे पहले तो उन महान मात-पिता को सलाम जिन्होंने ऐसे महान व्यक्तित्व "प्रदीप नील" को अपने महान संस्कारों से इस काबिल बनाया कि वो अपने प्यारे प्रदेश हरियाणा के लिए इतना कुछ कर पाए।
मैं इस पुस्तक को पढकर इतना अभिभूत हुआ कि पहले पन्ने को पढते-2 बचपन में चला गया और अभी तक भी वापिस नही लौट पाया हूँ।
इस पुस्तक 
 "जाट कहवै - सुण जाटणी " को मैं दो बार पढ चुका हूँ।
जहाँ तक सवाल है माँ बोली हरियाणवी के रख-रखाव का,तो इसमें कोई शक नही कि प्रदीप जी के इस सराहनीय प्रयास से हरियाणवी बोली विदेशों तक भी पहुँच चुकी है।
इस महान कार्य का मैं शब्दो में धन्यवाद नही कर सकता।
अंत में इतना ही कहना चाहूँगा कि हर सच्चे हरियाणवी को इस तरह का प्रयास जरूर करना चाहिए ।
हरियाणा और हरियाणवी के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ,
आपका अपना विकास हरियाणवी।

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