हरियाणवी में उपन्यास - सच कहू तो मैंने पहले कभी सुना ही नहीं था... अभी भी कई हफ्तों से केवल अपने मित्रो की पोस्ट इस बारे में देख कर ही काम चला रहा था... इस रविवार जाना हैं प्रगति मैदान, बुक फेयर में... बडौत के लेखक Amit Rai Jain जी की योग पर आधारित पुस्तक का विमोचन होना हैं... तब इस उपन्यास को भी जरुर खरीदना हैं... आप लोगो को भी इस उपन्यास को पढ़ना चाहिए... ये मैं अभी तक मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर कह रहा हूँ... अपना सही फीडबैक तो मित्र प्रदीप नील वशिष्ठ जी को उपन्यास पढने के बाद ही दे पाऊंगा...अगली पोस्ट जैन साहब की बुक के बारे में...
--रवि शर्मा
मेरे बडे भाई प्रदीप नील वशिष्ठ जी का हरियाणवी उपन्यास मेरे हाथ मे है ।ढेरों उपन्यास अब तक पढे है ।एक से एक महान और सफल लेखकों के ।पर वशिष्ठ जी का उपन्यास "विशिष्ठ" है कुछ अलग है अद्भुत है कारण कि यह हरियाणवी भाषा मे है ।रामचरितमानस महाभारत गीता जैसी अमर और शाश्वत रचनाये और गोदान ,गुनाहो के देवता से लेकर चेतन भगत तक को पढने के बाद भी एक बात मन मे जरूर रहती थी, काश हरियाणवी मे कोई बढिया किताब होती मजा आ जाता ।हरियाणा जैसे छोटे से प्रान्त से भी बडे लेखक हुए है ।पर अपनी भाषा मे पढने का आनन्द अलग ही है ।प्रिय प्रदीप नील भाई आपने हमे ऐसा आन्न्द प्रदान किया है जिसको मै अपने ही तरीके से कहना चाहूगां यानि कैसा लग रहा है "जाट कहवै सुन जाटनी " तो ऐसा लग रहा है जैसे फाईव स्टार मे बैठ के मम्मी के हाथ की बनी वो लाल मिर्च की चटनी !!! बाकि की साहित्यिक समीक्षा तो उपन्यास के पढने के बाद करूगा ।यह खुशी तो सिर्फ हरियाणवी उपन्यास के हाथ मे आने भर की है जिसे मैने अपनो के साथ प्रकट करना व सांझा करना चाहा है ।
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